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फिर उसी रहगुज़र पर शायद
अहमद फ़राज़ द्वारा
پھر اسی رہ گزار پر شاید
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गुमान यही है कि दिल ख़ुद इधर को जाता है
अहमद फ़राज़ द्वारा
گماں یہی ہے کہ دل خود ادھر کو جاتا ہے
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