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ऐ सनम तू सनम है निराला
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
اے صنم تو صنم ہے نرالا
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मुझ को दुनिया के हर इक ग़म से छुड़ा रखा है
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
مجھ کو دنیا کے ہر اک غم سے چھڑا رکھا ہے
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