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ग़ज़ल2
अश्क आँख में फिर अटक रहा है
اشک آنکھ میں پھر اٹک رہا ہے
क़दमों में भी तकान थी घर भी क़रीब था
قدموں میں بھی تکان تھی گھر بھی قریب تھا
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उर्दू अदब की रूह की हिफ़ाज़त

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