Ashk Aankh Mein Phir Atak Raha Hai
اشک آنکھ میں پھر اٹک رہا ہے
अश्क आँख में फिर अटक रहा है
ग़ज़ल
१ मिनट पढ़ने मेंاشک آنکھ میں پھر اٹک رہا ہے
کنکر سا کوئی کھٹک رہا ہے
Ashk aankh mein phir atak raha hai
Kankar sa koi khatak raha hai
میں اس کے خیال سے گریزاں
وہ میری صدا جھٹک رہا ہے
تحریر اسی کی ہے مگر دل
خط پڑھتے ہوئے اٹک رہا ہے
ہیں فون پہ کس کے ساتھ باتیں
اور ذہن کہاں بھٹک رہا ہے
Hain phone pe kis ke saath baatein
Aur zehan kahan bhatak raha hai
हैं फ़ोन पे किस के साथ बातें
और ज़ेहन कहाँ भटक रहा है

परवीन शाकिर1952–1994
परवीन शाकिर उर्दू की वो अनूठी और मक़बूल शायरा थीं, जिन्होंने औरतों के जज़्बातों, इश्क़ की गहराई और सामाजिक जुल्म के ख़िलाफ़ बेबाक आवाज़ उठाकर स्त्री शायरी को एक नया आयाम दिया।
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