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समंदर

सभी 2अशआर 0ग़ज़ल 2
ग़ज़ल2
तारा तारा उतर रही है रात समंदर में
تارا تارا اتر رہی ہے رات سمندر میں
हर जज़्र-ओ-मद से दस्त-ओ-बग़ल उठते हैं ख़रोश
ہر جزر و مد سے دست و بغل اٹھتے ہیں خروش
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उर्दू अदब की रूह की हिफ़ाज़त

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