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शाम

सभी 3अशआर 0ग़ज़ल 3
ग़ज़ल3
साये ढलने चराग़ जलने लगे
سائے ڈھلنے چراغ جلنے لگے
हुई है शाम तो आँखों में बस गया फिर तो
ہوئی ہے شام تو آنکھوں میں بس گیا پھر تو
शाम आई तिरी यादों के सितारे निकले
شام آئی تری یادوں کے ستارے نکلے
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