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कहाँ आ के रुकने थे रास्ते कहाँ मोड़ था उसे भूल जा
کہاں آ کے رکنے تھے راستے کہاں موڑ تھا اسے بھول جا
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कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तेरा ख़याल भी
کچھ تو ہوا بھی سرد تھی کچھ تھا ترا خیال بھی
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न दिल से आह न लब से सदा निकलती है
نہ دل سے آہ نہ لب سے صدا نکلتی ہے
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गुफ़्तगू जब महाल की होगी
گفتگو جب محال کی ہوگی
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ख़ुशी की बात है या दुख का मंज़र देख सकती हूँ
خوشی کی بات ہے یا دکھ کا منظر دیکھ سکتی ہوں
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