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विसाल

सभी 7अशआर 0ग़ज़ल 7
ग़ज़ल7
कहाँ आ के रुकने थे रास्ते कहाँ मोड़ था उसे भूल जा
کہاں آ کے رکنے تھے راستے کہاں موڑ تھا اسے بھول جا
कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तेरा ख़याल भी
کچھ تو ہوا بھی سرد تھی کچھ تھا ترا خیال بھی
न दिल से आह न लब से सदा निकलती है
نہ دل سے آہ نہ لب سے صدا نکلتی ہے
गुफ़्तगू जब महाल की होगी
گفتگو جب محال کی ہوگی
ख़ुशी की बात है या दुख का मंज़र देख सकती हूँ
خوشی کی بات ہے یا دکھ کا منظر دیکھ سکتی ہوں
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उर्दू अदब की रूह की हिफ़ाज़त

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