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वो दुश्मन-ए-जाँ जाँ से प्यारा भी कभी था
अहमद फ़राज़ द्वारा
وہ دشمن جاں جان سے پیارا بھی کبھی تھا
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शब था नालाँ अज़ीज़ कोई था
मीर तक़ी मीर द्वारा
شب تھا نالاں عزیز کوئی تھا
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कभी कभी तो बहुत याद आने लगते हो
जौन एलिया द्वारा
کبھی کبھی تو بہت یاد آنے لگتے ہو
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कान लगा कर सुनती रातें बातें करते दिन
Amjad Islam Amjad द्वारा
کان لگا کر سنتی راتیں باتیں کرتے دن
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शाम आई तिरी यादों के सितारे निकले
परवीन शाकिर द्वारा
شام آئی تری یادوں کے ستارے نکلے
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जो ज़िंदगी बची है उसे मत गँवाइए
जौन एलिया द्वारा
جو زندگی بچی ہے اسے مت گنوائیے
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दिल कितना आबाद हुआ जब दीद के घर बर्बाद हुए
जौन एलिया द्वारा
دل کتنا آباد ہوا جب دید کے گھر برباد ہوئے
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रात में इस कशमकश में एक पल सोया नहीं
Amjad Islam Amjad द्वारा
رات میں اس کشمکش میں ایک پل سویا نہیں
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पलकों की दहलीज़ पे चमका एक सितारा था
Amjad Islam Amjad द्वारा
پلکوں کی دہلیز پہ چمکا ایک ستارا تھا
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ख़याल-ओ-ख़्वाब हुआ बर्ग-ओ-बार का मौसम
परवीन शाकिर द्वारा
خیال و خواب ہوا برگ و بار کا موسم
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नम हैं पलकें तिरी ऐ मौज-ए-हवा रात के साथ
परवीन शाकिर द्वारा
نم ہیں پلکیں تری اے موج ہوا رات کے ساتھ
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सुंदर कोमल सपनों की बारात गुज़र गई जानाँ
परवीन शाकिर द्वारा
سندر کومل سپنوں کی بارات گزر گئی جاناں
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शाख़-ए-उम्मीद जल गई होगी
जौन एलिया द्वारा
شاخ امید جل گئی ہوگی
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दौलत-ए-दहर सब लुटाई है
जौन एलिया द्वारा
دولت دہر سب لٹائی ہے
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यादों का हिसाब रख रहा हूँ
जौन एलिया द्वारा
یادوں کا حساب رکھ رہا ہوں
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तू भी चुप है मैं भी चुप हूँ ये कैसी तन्हाई है
जौन एलिया द्वारा
تو بھی چپ ہے میں بھی چپ ہوں یہ کیسی تنہائی ہے
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हम भी शायर थे कभी जान-ए-सुख़न याद नहीं
अहमद फ़राज़ द्वारा
ہم بھی شاعر تھے کبھی جان سخن یاد نہیں
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हर आशना में कहाँ ख़ू-ए-महरमाना वो
अहमद फ़राज़ द्वारा
ہر آشنا میں کہاں خوئے محرمانہ وہ
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ग़म-ए-दुनिया से गर पाई भी फ़ुर्सत सर उठाने की
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
غم دنیا سے گر پائی بھی فرصت سر اٹھانے کی
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फिर मुझे दीदा-ए-तर याद आया
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
پھر مجھے دیدۂ تر یاد آیا
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