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याद के सहरा में कुछ तो ज़िंदगी आए नज़र
یاد کے صحرا میں کچھ تو زندگی آئے نظر
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फिरते हैं अब भी दिल को गरेबाँ किए हुए
پھرتے ہیں اب بھی دل کو گریباں کیے ہوئے
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सामने उस के कभी उस की सताइश नहीं की
سامنے اس کے کبھی اس کی ستائش نہیں کی
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हम ने ही लौटने का इरादा नहीं किया
ہم نے ہی لوٹنے کا ارادہ نہیں کیا
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दिल इश्क़ का हमेशा हरीफ़-ए-नबर्द था
دل عشق کا ہمیشہ حریف نبرد تھا
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