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याद के सहरा में कुछ तो ज़िंदगी आए नज़र
Amjad Islam Amjad द्वारा
یاد کے صحرا میں کچھ تو زندگی آئے نظر
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फिरते हैं अब भी दिल को गरेबाँ किए हुए
अहमद फ़राज़ द्वारा
پھرتے ہیں اب بھی دل کو گریباں کیے ہوئے
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सामने उस के कभी उस की सताइश नहीं की
अहमद फ़राज़ द्वारा
سامنے اس کے کبھی اس کی ستائش نہیں کی
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हम ने ही लौटने का इरादा नहीं किया
परवीन शाकिर द्वारा
ہم نے ہی لوٹنے کا ارادہ نہیں کیا
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दिल इश्क़ का हमेशा हरीफ़-ए-नबर्द था
मीर तक़ी मीर द्वारा
دل عشق کا ہمیشہ حریف نبرد تھا
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जब यार ने रख़्त-ए-सफ़र बाँधा
अहमद फ़राज़ द्वारा
جب یار نے رخت سفر باندھا
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जिन्स-ए-गिराँ को तुझ से जो लोग चाहते हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
جنس گراں کو تجھ سے جو لوگ چاہتے ہیں
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कमाल-ए-ज़ब्त को ख़ुद भी तो आज़माऊँगी
परवीन शाकिर द्वारा
کمال ضبط کو خود بھی تو آزماؤں گی
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तेग़-ए-सितम से उस की मिरा सर जुदा हुआ
मीर तक़ी मीर द्वारा
تیغ ستم سے اس کی مرا سر جدا ہوا
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मर रहते जो गुल बन तो सारा यह ख़लल जाता
मीर तक़ी मीर द्वारा
مر رہتے جو گل بن تو سارا یہ خلل جاتا
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