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दश्त-ए-दिल में सराब ताज़ा हैं
دشت دل میں سراب تازہ ہیں
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सैर के क़ाबिल है दिल सद-पारा उस नख़चीर का
سیر کے قابل ہے دل صد پارہ اس نخچیر کا
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कली कहते हैं उस का सा दहन है
کلی کہتے ہیں اس کا سا دہن ہے
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बिछड़ा है जो इक बार तो मिलते नहीं देखा
بچھڑا ہے جو اک بار تو ملتے نہیں دیکھا
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दुख नोश्ता है तो आँधी को लिखा आहिस्ता
دکھ نوشتہ ہے تو آندھی کو لکھا آہستہ
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