Dil Mira Phir Dukha Diya Kin Ne
دل مرا پھر دکھا دیا کن نے
दिल मिरा फिर दुखा दिया किन ने
ग़ज़ल
१ मिनट पढ़ने मेंدل مرا پھر دکھا دیا کن نے
سو گیا تھا جگا دیا کن نے
Dil mira phir dukha diya kin ne
So gaya tha jaga diya kin ne
दिल मिरा फिर दुखा दिया किन ने
सो गया था जगा दिया किन ने
میں کہاں اور خیال بوسہ کہاں
منہ سے منہ یوں بھڑا دیا کن نے
Main kahan aur khayal-e-bosa kahan
Munh se munh yoon bhida diya kin ne
मैं कहाँ और ख़याल-ए-बोसा कहाँ
मुँह से मुँह यूँ भिड़ा दिया किन ने
وہ مرے چاہنے کو کیا جانے
یہ سندیسا سنا دیا کن نے
Voh mire chahne ko kya jaane
Yeh sandesa suna diya kin ne
वो मिरे चाहने को क्या जाने
यह संदेसा सुना दिया किन ने

ख़्वाजा मीर दर्द1720–1785
शास्त्रीय
ख़्वाजा मीर दर्द अठारहवीं सदी के एक जाने-माने सूफी शायर और संगीत के मर्मज्ञ थे, जिनकी शायरी तसव्वुफ, इलाही इश्क और रूहानी गहराई की मिसाल है।
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