Garm Faryaad Rakha Shakl-e-Nihali Ne Mujhe
گرم فریاد رکھا شکل نہالی نے مجھے
गर्म फ़रियाद रक्खा शक्ल-ए-निहाली ने मुझे
ग़ज़ल
१ मिनट पढ़ने मेंگرم فریاد رکھا شکل نہالی نے مجھے
تب اماں ہجر میں دی برد لیالی نے مجھے
Garm faryaad rakha shakl-e-nihali ne mujhe
Tab amaan hijr mein di bard-e-layali ne mujhe
गर्म फ़रियाद रक्खा शक्ल-ए-निहाली ने मुझे
तब अमाँ हिज्र में दी बर्द-ए-लयाली ने मुझे
نسیہ و نقد دو عالم کی حقیقت معلوم
لے لیا مجھ سے مری ہمت عالی نے مجھے
Nasiya o naqd-e-do aalam ki haqeeqat maloom
Le liya mujh se miri himmat-e-aali ne mujhe
नसिया-ओ-नक़्द-ए-दो-आलम की हक़ीक़त मालूम
ले लिया मुझ से मिरी हिम्मत-ए-आली ने मुझे
کثرت آرائی وحدت ہے پرستاری وہم
کر دیا کافر ان اصنام خیالی نے مجھے
Kasrat-aaraai-e-wahdat hai paristaari-e-wahm
Kar diya kaafir in asnaam-e-khayali ne mujhe
कसरत-आराई-ए-वहदत है परस्तारी-ए-वहम
कर दिया काफ़िर इन असनाम-ए-ख़याली ने मुझे

शास्त्रीय
मिर्ज़ा ग़ालिब उर्दू के वो अज़ीम और मशहूर शायर हैं, जिन्होंने क्लासिकी और जदीद दौर के बीच एक पुल का काम किया, और जिनके शेर आज भी इंसानी ज़िन्दगी के हर पहलू को बयान करते हैं।
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