Na Poochh Khwaab Zulekha Ne Kya Khayal Liya
نہ پوچھ خواب زلیخا نے کیا خیال لیا
न पूछ ख़्वाब ज़ुलैख़ा ने क्या ख़याल लिया
ग़ज़ल
१ मिनट पढ़ने मेंنہ پوچھ خواب زلیخا نے کیا خیال لیا
کہ کارواں کا کنعاں کے جی نکال لیا
Na poochh khwaab Zulekha ne kya khayal liya
Ke kaarwan ka Kanaan ke jee nikaal liya
न पूछ ख़्वाब ज़ुलैख़ा ने क्या ख़याल लिया
कि कारवाँ का कनआँ के जी निकाल लिया
رہ طلب میں گرے ہوتے سر کے بل ہم بھی
شکستہ پائی نے اپنی ہمیں سنبھال لیا
Rah-e-talab mein gire hote sar ke bal hum bhi
Shikasta-paai ne apni humein sambhaal liya
रह-ए-तलब में गिरे होते सर के बल हम भी
शिकस्ता-पाई ने अपनी हमें सँभाल लिया

मीर तक़ी मीर1723–1810
शास्त्रीय
मीर ताक़ी 'मीर' उर्दू के महानतम क्लासिक शायर हैं, जिन्हें 'ख़ुदा-ए-सुख़न' (शायरी का ईश्वर) कहा जाता है। उन्होंने जीवन के दुखों को बेहद सरल भाषा में ढालकर उर्दू ग़ज़ल को अमर बना दिया।
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