उस्ताद क़मर जलालवी क्लासिकी ग़ज़ल के वो अज़ीम शायर हैं, जिन्होंने एक साइकिल मैकेनिक के तौर पर मिले 'उस्ताद' के लक़ब (उपाधि) को अपनी बेहतरीन शायरी से एक अदबी पहचान में बदल दिया।
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