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आए कुछ अब्र कुछ शराब आए
آئے کچھ ابر کچھ شراب آئے
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पीते ही सुर्ख़ आँखें हैं मस्त शराब की
پیتے ہی سرخ آنکھیں ہیں مست شراب کی
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हम शक्ल कह दिया था रुख़ ला जवाब का
ہم شکل کہہ دیا تھا رخ لا جواب کا
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ऐ तू कि रोज़ ओ शब को मह ओ आफ़ताब दे
اے تو کہ روز و شب کو مہ و آفتاب دے
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