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दिल जो ज़ेर-ए-ग़ुबार अक्सर था
मीर तक़ी मीर द्वारा
دل جو زیر غبار اکثر تھا
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था मुस्तआर हुस्न से उस के जो नूर था
मीर तक़ी मीर द्वारा
تھا مستعار حسن سے اس کے جو نور تھا
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राह-ए-दूर-ए-इश्क़ में रोता है क्या
मीर तक़ी मीर द्वारा
راہ دور عشق میں روتا ہے کیا
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जिस सर को ग़ुरूर आज है यां ताजवरी का
मीर तक़ी मीर द्वारा
جس سر کو غرور آج ہے یاں تاجوری کا
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हरम है क्या चीज़ देर क्या है किसी पे मेरी नज़र नहीं है
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
حرم ہے کیا چیز دیر کیا ہے کسی پہ میری نظر نہیں ہے
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अब वही हर्फ़-ए-जुनूं सब की ज़बां ठहरी है
فیض احمد فیض द्वारा
اب وہی حرف جنوں سب کی زباں ٹھہری ہے
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दश्त-ए-दिल में सराब ताज़ा हैं
Amjad Islam Amjad द्वारा
دشت دل میں سراب تازہ ہیں
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अपनी ही आवाज़ को बे शक कान में रखना
अहमद फ़राज़ द्वारा
اپنی ہی آواز کو بے شک کان میں رکھنا
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दर-ए-कायनात जो वा करे उसी आगही की तलाश है
Amjad Islam Amjad द्वारा
در کائنات جو وا کرے اسی آگہی کی تلاش ہے
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अपनी ही आवाज़ को बे-शक़ कान में रखना
अहमद फ़राज़ द्वारा
اپنی ہی آواز کو بے شک کان میں رکھنا
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हर हक़ीक़त मज़ाज़ हो जाए
فیض احمد فیض द्वारा
ہر حقیقت مجاز ہو جائے
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क़ामत को तेरे सर्व-ए-सनोबर नहीं कहा
अहमद फ़राज़ द्वारा
قامت کو تیرے سرو صنوبر نہیں کہا
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समझना फ़हम गर कुछ है तबीई से इलाही को
ख़्वाजा मीर दर्द द्वारा
سمجھنا فہم گر کچھ ہے طبیعی سے الٰہی کو
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न आसमाँ से न दुश्मन के ज़ोर-ओ-ज़र से हुआ
Amjad Islam Amjad द्वारा
نہ آسماں سے نہ دشمن کے زور و زر سے ہوا
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आज़-ए-अहल-ए-सितम की बात करो
فیض احمد فیض द्वारा
عجز اہل ستم کی بات کرو
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जो भी दरून-ए-दिल है वो बाहर न आएगा
अहमद फ़राज़ द्वारा
جو بھی درون دل ہے وہ باہر نہ آئے گا
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ख़ुशी की बात है या दुख का मंज़र देख सकती हूँ
परवीन शाकिर द्वारा
خوشی کی بات ہے یا دکھ کا منظر دیکھ سکتی ہوں
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उसने आहिस्ता से जब पुकारा मुझे
Amjad Islam Amjad द्वारा
اس نے آہستہ سے جب پکارا مجھے
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दर-ए-कायनात जो वा करे उसी आगही की तलाश है
Amjad Islam Amjad द्वारा
در کائنات جو وا کرے اسی آگہی کی تلاش ہے
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शाम तक मेरी बेकली है शराब
जौन एलिया द्वारा
شام تک میری بیکلی ہے شراب
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