ADABKHANA
शोअरा
ग़ज़लें
अशआर
मुहावरे
लुग़त
और
कुल्लियात
टैग्स
खोज
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
खोज
लॉगिन
रजिस्टर करें
लॉगिन करें
खाता बनाएँ
← टैग्स पर वापस
आजिज़ी
सभी
16
अशआर
0
ग़ज़ल
16
ग़ज़ल
16
0
मेरी लौ लगी है तुझसे ग़म-ए-ज़िंदगी मिटा दे
مری لو لگی ہے تجھ سے غم زندگی مٹا دے
0
मक्का गया मदीना गया कर्बला गया
مکہ گیا مدینہ گیا کربلا گیا
0
हर हक़ीक़त मज़ाज़ हो जाए
ہر حقیقت مجاز ہو جائے
0
ग़नीम से भी अदावत में हद नहीं मांगी
غنیم سے بھی عداوت میں حد نہیں مانگی
0
अब हाल अपना उस के है दिल-ख़्वाह
اب حال اپنا اس کے ہے دل خواہ
सभी देखें
कवियों की सूची
कवियों
और जानें