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आजिज़ी

सभी 16अशआर 0ग़ज़ल 16
ग़ज़ल16
मेरी लौ लगी है तुझसे ग़म-ए-ज़िंदगी मिटा दे
مری لو لگی ہے تجھ سے غم زندگی مٹا دے
मक्का गया मदीना गया कर्बला गया
مکہ گیا مدینہ گیا کربلا گیا
हर हक़ीक़त मज़ाज़ हो जाए
ہر حقیقت مجاز ہو جائے
ग़नीम से भी अदावत में हद नहीं मांगी
غنیم سے بھی عداوت میں حد نہیں مانگی
अब हाल अपना उस के है दिल-ख़्वाह
اب حال اپنا اس کے ہے دل خواہ
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उर्दू अदब की रूह की हिफ़ाज़त

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