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ऐ सनम देर न कर अंजुमन आरा हो जा
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
اے صنم دیر نہ کر انجمن آرا ہو جا
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यूं न आँखें बदल मुझ से मेरे सनम
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
یوں نہ آنکھیں بدل مجھ سے میرے صنم
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सब क़त्ल हो के तेरे मुक़ाबिल से आए हैं
فیض احمد فیض द्वारा
سب قتل ہو کے تیرے مقابل سے آئے ہیں
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