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मेरी लौ लगी है तुझसे ग़म-ए-ज़िंदगी मिटा दे
مری لو لگی ہے تجھ سے غم زندگی مٹا دے
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चांद निकले किसी जानिब तेरी ज़ेबाई का
چاند نکلے کسی جانب تری زیبائی کا
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किए आरज़ू से पैमां जो मा'ल तक न पहुंचे
کیے آرزو سے پیماں جو مآل تک نہ پہنچے
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गरचह कब देखते हो पर देखो
گرچہ کب دیکھتے ہو پر دیکھو
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बरंग-ए-बू-ए-गुल इस बाग़ के हम आश्ना होते
برنگ بوئے گل اس باغ کے ہم آشنا ہوتے
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