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मेरी लौ लगी है तुझसे ग़म-ए-ज़िंदगी मिटा दे
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
مری لو لگی ہے تجھ سے غم زندگی مٹا دے
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चांद निकले किसी जानिब तेरी ज़ेबाई का
فیض احمد فیض द्वारा
چاند نکلے کسی جانب تری زیبائی کا
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किए आरज़ू से पैमां जो मा'ल तक न पहुंचे
فیض احمد فیض द्वारा
کیے آرزو سے پیماں جو مآل تک نہ پہنچے
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गरचह कब देखते हो पर देखो
मीर तक़ी मीर द्वारा
گرچہ کب دیکھتے ہو پر دیکھو
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बरंग-ए-बू-ए-गुल इस बाग़ के हम आश्ना होते
मीर तक़ी मीर द्वारा
برنگ بوئے گل اس باغ کے ہم آشنا ہوتے
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तुझे ढूँढती हैं नज़रें मुझे एक झलक दिखा जा
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
تجھے ڈھونڈھتی ہیں نظریں مجھے اک جھلک دکھا جا
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क्या ऐसे कम-सुख़न से कोई गुफ़्तगू करे
अहमद फ़राज़ द्वारा
کیا ایسے کم سخن سے کوئی گفتگو کرے
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क्या कहिए क्या रखें हैं हम तुझ से यार ख़्वाहिश
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا کہیے کیا رکھیں ہیں ہم تجھ سے یار خواہش
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यह चश्म आईना-दार-ए-रू थी किसू की
मीर तक़ी मीर द्वारा
یہ چشم آئینہ دار رو تھی کسو کی
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दुख नोश्ता है तो आँधी को लिखा आहिस्ता
परवीन शाकिर द्वारा
دکھ نوشتہ ہے تو آندھی کو لکھا آہستہ
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अपनी मंज़िल का रास्ता भेजो
जौन एलिया द्वारा
اپنی منزل کا راستہ بھیجو
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सीन-ओ-दिल हसरतों से छा गया
ख़्वाजा मीर दर्द द्वारा
سینہ و دل حسرتوں سے چھا گیا
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जो न नक़्द-ए-दाग़-ए-दिल की करे शोला पासबानी
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
جو نہ نقد داغ دل کی کرے شعلہ پاسبانی
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लाغر इतना हूँ कि गर तू बज़्म में जा दे मुझे
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
لاغر اتنا ہوں کہ گر تو بزم میں جا دے مجھے
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हर्फ़ ताज़ा नई ख़ुशबू में लिखा चाहता है
परवीन शाकिर द्वारा
حرف تازہ نئی خوشبو میں لکھا چاہتا ہے
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समुंदरों के उधर से कोई सदा आई
परवीन शाकिर द्वारा
سمندروں کے ادھر سے کوئی صدا آئی
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क़रिय-ए-जाँ में कोई फूल खिलाने आए
परवीन शाकिर द्वारा
قریۂ جاں میں کوئی پھول کھلانے آئے
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बेताबियों में तंग हम आए हैं जान से
मीर तक़ी मीर द्वारा
بیتابیوں میں تنگ ہم آئے ہیں جان سے
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तंग आग़ोश में आबाद करूँगा तुझ को
जौन एलिया द्वारा
تنگ آغوش میں آباد کروں گا تجھ کو
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तू नहीं तेरा इस्तिआरा नहीं
Amjad Islam Amjad द्वारा
تو نہیں تیرا استعارا نہیں
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