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हस्ती अपनी हबाब की सी है
ہستی اپنی حباب کی سی ہے
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हैरान है जबीं आज किधर सज्दा रवां है
حیراں ہے جبیں آج کدھر سجدہ روا ہے
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हम आप ही को अपना मक़सूद जानते हैं
ہم آپ ہی کو اپنا مقصود جانتے ہیں
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तुम हो शरीक-ए-ग़म तो मुझे कोई ग़म नहीं
تم ہو شریک غم تو مجھے کوئی غم نہیں
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गो सब को बहम सागर-ओ-बादा तो नहीं था
گو سب کو بہم ساغر و بادہ تو نہیں تھا
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