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हस्ती अपनी हबाब की सी है
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہستی اپنی حباب کی سی ہے
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हैरान है जबीं आज किधर सज्दा रवां है
فیض احمد فیض द्वारा
حیراں ہے جبیں آج کدھر سجدہ روا ہے
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हम आप ही को अपना मक़सूद जानते हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہم آپ ہی کو اپنا مقصود جانتے ہیں
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तुम हो शरीक-ए-ग़म तो मुझे कोई ग़म नहीं
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
تم ہو شریک غم تو مجھے کوئی غم نہیں
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गो सब को बहम सागर-ओ-बादा तो नहीं था
فیض احمد فیض द्वारा
گو سب کو بہم ساغر و بادہ تو نہیں تھا
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कई बार इसका दामन भर दिया हुस्न-ए-दो आलम से
فیض احمد فیض द्वारा
کئی بار اس کا دامن بھر دیا حسنِ دو عالم سے
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दैर-ओ-हरम से गुज़रे अब दिल है घर हमारा
मीर तक़ी मीर द्वारा
دیر و حرم سے گزرے اب دل ہے گھر ہمارا
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क्या कहूं तुम से मैं कि क्या है इश्क़
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا کہوں تم سے میں کہ کیا ہے عشق
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ये जो हासिल हमें हर शय की फ़रावानी है
Amjad Islam Amjad द्वारा
یہ جو حاصل ہمیں ہر شے کی فراوانی ہے
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क्या हक़ीक़त कहूँ कि क्या है इश्क़
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا حقیقت کہوں کہ کیا ہے عشق
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आज़-ए-अहल-ए-सितम की बात करो
فیض احمد فیض द्वारा
عجز اہل ستم کی بات کرو
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न अब रक़ीब न नासेह न ग़म-गुसार कोई
فیض احمد فیض द्वारा
نہ اب رقیب نہ ناصح نہ غم گسار کوئی
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शाम ढले जब बस्ती वाले लौट के घर को आते हैं
Amjad Islam Amjad द्वारा
شام ڈھلے جب بستی والے لوٹ کے گھر کو آتے ہیں
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एक साया मिरा मसीहा था
जौन एलिया द्वारा
ایک سایہ مرا مسیحا تھا
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दिल के म'मूरे की मत कर फ़िक्र फ़ुर्सत चाहिए
मीर तक़ी मीर द्वारा
دل کے معمورے کی مت کر فکر فرصت چاہیے
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ग़लत है इश्क़ में ऐ बुलहवस अंदेशा राहत का
मीर तक़ी मीर द्वारा
غلط ہے عشق میں اے بوالہوس اندیشہ راحت کا
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मुझ को तुझ से जो कुछ मोहब्बत है
ख़्वाजा मीर दर्द द्वारा
مجھ کو تجھ سے جو کچھ محبت ہے
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ज़बाँ रख ग़ुंचा सा अपने दहन में
मीर तक़ी मीर द्वारा
زباں رکھ غنچہ ساں اپنے دہن میں
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देखता रहता हूँ मैं जो कुछ परेशानी करे
Amjad Islam Amjad द्वारा
دیکھتا رہتا ہوں میں جو کچھ پریشانی کرے
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