Tere Dar Se Na Utha Hoon Na Uthunga Ae Dost
تیرے در سے نہ اٹھا ہوں نہ اٹھوں گا اے دوست
तेरे दर से न उठा हूँ न उठूँगा ऐ दोस्त
ग़ज़ल
१ मिनट पढ़ने मेंتیرے در سے نہ اٹھا ہوں نہ اٹھوں گا اے دوست
زندگی تیرے بنا خواب ہے افسانہ ہے
Tere dar se na utha hoon na uthunga ae dost
Zindagi tere bina khwaab hai afsaana hai
तेरे दर से न उठा हूँ न उठूँगा ऐ दोस्त
ज़िंदगी तेरे बिना ख़्वाब है अफ़साना है

फ़ना बुलंदशहरी1912–1986
एक महान सूफ़ी शायर और उस्ताद क़मर जलाली के शागिर्द, जिन्हें उनके विश्वप्रसिद्ध कलाम "मेरे रश्क-ए-क़मर" के लिए जाना जाता है।
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