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मेरी लौ लगी है तुझसे ग़म-ए-ज़िंदगी मिटा दे
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
مری لو لگی ہے تجھ سے غم زندگی مٹا دے
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जीते जी कूचए-दिल-दार से जाया न गया
मीर तक़ी मीर द्वारा
جیتے جی کوچۂ دل دار سے جایا نہ گیا
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ऐ दोस्त कोई मुझ सा रुस्वा न हुआ होगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
اے دوست کوئی مجھ سا رسوا نہ ہوا ہوگا
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हमारे आगे तिरा जब कसू ने नाम लिया
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہمارے آگے ترا جب کسو نے نام لیا
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क्या कहूं तुम से मैं कि क्या है इश्क़
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا کہوں تم سے میں کہ کیا ہے عشق
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होता है यां जहां में हर रोज़-ओ-शब तमाशा
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہوتا ہے یاں جہاں میں ہر روز و شب تماشا
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तेरे दर से न उठा हूँ न उठूँगा ऐ दोस्त
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
تیرے در سے نہ اٹھا ہوں نہ اٹھوں گا اے دوست
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लाغر इतना हूँ कि गर तू बज़्म में जा दे मुझे
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
لاغر اتنا ہوں کہ گر تو بزم میں جا دے مجھے
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मशहूर चमन में तिरी गुल पैरहनी है
मीर तक़ी मीर द्वारा
مشہور چمن میں تری گل پیرہنی ہے
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