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सवाल छोड़ कि हालत ये क्यों बनाई है
سوال چھوڑ کہ حالت یہ کیوں بنائی ہے
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क़ाबू ख़िज़ाँ से ज़ो'फ़ का गुलशन में बन गया
قابو خزاں سے ضعف کا گلشن میں بن گیا
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जला दिया शजर-ए-जाँ के सब्ज़ बख़्त न था
جلا دیا شجر جاں کہ سبز بخت نہ تھا
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