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क्या कहिए कि ख़ूबां ने अब हम में है क्या रखा
کیا کہیے کہ خوباں نے اب ہم میں ہے کیا رکھا
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जाँ गुदाज़ इतनी कहाँ आवाज़ ऊद-ओ-चंग है
جاں گداز اتنی کہاں آواز عود و چنگ ہے
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हो का आलम है यहाँ नाला-गरों के होते
ہو کا عالم ہے یہاں نالہ گروں کے ہوتے
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तू नहीं तेरा इस्तिआरा नहीं
تو نہیں تیرا استعارا نہیں
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चारा-साज़ों की अज़ीयत नहीं देखी जाती
چارہ سازوں کی اذیت نہیں دیکھی جاتی
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