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आलम में कोई दिल का तलबगार न पाया
मीर तक़ी मीर द्वारा
عالم میں کوئی دل کا طلب گار نہ پایا
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कुछ फ़ैसला तो हो कि किधर जाना चाहिए
परवीन शाकिर द्वारा
کچھ فیصلہ تو ہو کہ کدھر جانا چاہیے
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बे-दम हुए बीमार दवा क्यों नहीं देते
فیض احمد فیض द्वारा
بے دم ہوئے بیمار دوا کیوں نہیں دیتے
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एक परवाज़ को भी रुख़सत-ए-सय्याद नहीं
मीर तक़ी मीर द्वारा
ایک پرواز کو بھی رخصت صیاد نہیں
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गुस्से से उठ चले हो तो दामन को झाड़ कर
मीर तक़ी मीर द्वारा
غصے سے اٹھ چلے ہو تو دامن کو جھاڑ کر
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बादबाँ खुलने से पहले का इशारा देखना
परवीन शाकिर द्वारा
بادباں کھلنے سے پہلے کا اشارہ دیکھنا
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हर सिम्त परेशां तेरी आमद के क़रीने
فیض احمد فیض द्वारा
ہر سمت پریشاں تری آمد کے قرینے
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फिर हरीफ़-ए-बहार हो बैठे
فیض احمد فیض द्वारा
پھر حریفِ بہار ہو بیٹھے
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चलने का हौसला नहीं रुकना मुहाल कर दिया
परवीन शाकिर द्वारा
چلنے کا حوصلہ نہیں رکنا محال کر دیا
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अपने सब यार काम कर रहे हैं
जौन एलिया द्वारा
اپنے سب یار کام کر رہے ہیں
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हमें से अपनी नवा हम-कलाम होती रही
فیض احمد فیض द्वारा
ہمیں سے اپنی نوا ہم کلام ہوتی رہی
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यूँ ही मर मर के जिएँ वक़्त गुज़ारे जाएँ
अहमद फ़राज़ द्वारा
یوں ہی مر مر کے جئیں وقت گزارے جائیں
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दस्त-ओ-पा मारे वक़्त-ए-बिस्मिल तक
मीर तक़ी मीर द्वारा
دست و پا مارے وقت بسمل تک
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क्या कहूँ कैसा सितम ग़फ़लत से मुझ पर हो गया
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا کہوں کیسا ستم غفلت سے مجھ پر ہو گیا
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गई छाओं उस तेग़ की सर से जब की
मीर तक़ी मीर द्वारा
گئی چھاؤں اس تیغ کی سر سے جب کی
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दिल परेशाँ है क्या किया जाए
जौन एलिया द्वारा
دل پریشاں ہے کیا کیا جائے
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लाغر इतना हूँ कि गर तू बज़्म में जा दे मुझे
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
لاغر اتنا ہوں کہ گر تو بزم میں جا دے مجھے
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मुझ सोज़ बाद-ए-मर्ग से आगाह कौन है
मीर तक़ी मीर द्वारा
مجھ سوز بعد مرگ سے آگاہ کون ہے
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बेताबियों में तंग हम आए हैं जान से
मीर तक़ी मीर द्वारा
بیتابیوں میں تنگ ہم آئے ہیں جان سے
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सोज़िश-ए-दिल से मुफ़्त गुलते हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
سوزش دل سے مفت گلتے ہیں
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