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मानिंद-ए-शम्अ-ए-मजलिस-ए-शब अश्कबार पाया
مانند شمع مجلس شب اشکبار پایا
सुना है हाल तिरे कुश्तगाँ बेचारों का
سنا ہے حال ترے کشتگاں بیچاروں کا
मैं और बज़्म-ए-मय से यूँ तिश्ना-काम आऊँ
میں اور بزم مے سے یوں تشنہ کام آؤں
कहते हैं बहार आई गुल फूल निकलते हैं
کہتے ہیں بہار آئی گل پھول نکلتے ہیں
क़ैद में गुज़रेगी जो उम्र बड़े काम की थी
قید میں گزرے گی جو عمر بڑے کام کی تھی
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उर्दू अदब की रूह की हिफ़ाज़त

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