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मुँह तका ही करे है जिस तिस का
منہ تکا ہی کرے ہے جس تس کا
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अब तसव्वुर में हरम है न सनम ख़ाना है
اب تصور میں حرم ہے نہ صنم خانہ ہے
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तेरी नज़रों पे तसद्दुक़ आज अहल-ए-होश हैं
تیری نظروں پہ تصدق آج اہل ہوش ہیں
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कब तलक ये सितम उठाइयेगा
کب تلک یہ ستم اٹھائیے گا
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मक़ाम-ए-होश से गुज़रा मकाँ से ला-मकाँ पहुँचा
مقام ہوش سے گزرا مکاں سے لا مکاں پہنچا
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