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मुँह तका ही करे है जिस तिस का
मीर तक़ी मीर द्वारा
منہ تکا ہی کرے ہے جس تس کا
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अब तसव्वुर में हरम है न सनम ख़ाना है
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
اب تصور میں حرم ہے نہ صنم خانہ ہے
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तेरी नज़रों पे तसद्दुक़ आज अहल-ए-होश हैं
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
تیری نظروں پہ تصدق آج اہل ہوش ہیں
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कब तलक ये सितम उठाइयेगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
کب تلک یہ ستم اٹھائیے گا
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मक़ाम-ए-होश से गुज़रा मकाँ से ला-मकाँ पहुँचा
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
مقام ہوش سے گزرا مکاں سے لا مکاں پہنچا
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रहा गर कोई ता क़यामत सलामत
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
رہا گر کوئی تا قیامت سلامت
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दिल में भरा ज़ बसकि ख़याल-ए-शराब था
मीर तक़ी मीर द्वारा
دل میں بھرا ز بسکہ خیال شراب تھا
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तुम से भी अब तो जा चुका हूँ मैं
जौन एलिया द्वारा
تم سے بھی اب تو جا چکا ہوں میں
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उन ने किया था याद मुझे भूल कर कहीं
ख़्वाजा मीर दर्द द्वारा
ان نے کیا تھا یاد مجھے بھول کر کہیں
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नाम ही क्या निशाँ ही क्या ख़्वाब-ओ-ख़याल हो गए
जौन एलिया द्वारा
نام ہی کیا نشاں ہی کیا خواب و خیال ہو گئے
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