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कल मीर ने क्या क्या की मय के लिए बेताबी
کل میرؔ نے کیا کیا کی مے کے لیے بیتابی
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अब ज़ोफ़ से ढहता है बेताबी शिताबि की
اب ضعف سے ڈھہتا ہے بیتابی شتابی کی
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जराहत तोहफ़ा, अलमास अरमग़ां, दाग़-ए-जिगर हदिया
جراحت تحفہ الماس ارمغاں داغ جگر ہدیہ
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बेताबियों में तंग हम आए हैं जान से
بیتابیوں میں تنگ ہم آئے ہیں جان سے
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गुल शर्म से बह जाएगा गुलशन में हो कर आब सा
گل شرم سے بہہ جائے گا گلشن میں ہو کر آب سا
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