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सभी 69अशआर 0ग़ज़ल 69
ग़ज़ल69
जान से इश्क़ और जहाँ से गुरेज़
جان سے عشق اور جہاں سے گریز
ये आलम-ए-शौक़ का देखा न जाए
یہ عالم شوق کا دیکھا نہ جائے
लख़्त-ए-जिगर तो अपने यक लख़्त रो चुका था
لخت جگر تو اپنے یک لخت رو چکا تھا
ये ग़नीमत है कि उन आँखों ने पहचाना हमें
یہ غنیمت ہے کہ ان آنکھوں نے پہچانا ہمیں
वहशत थी हमें भी वही घर बार से अब तक
وحشت تھی ہمیں بھی وہی گھر بار سے اب تک
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उर्दू अदब की रूह की हिफ़ाज़त

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