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अब के तजदीद-ए-वफ़ा का नहीं इम्काँ जानाँ
अहमद फ़राज़ द्वारा
اب کے تجدید وفا کا نہیں امکاں جاناں
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इस अहद में इलाही मोहब्बत को क्या हुआ
मीर तक़ी मीर द्वारा
اس عہد میں الٰہی محبت کو کیا ہوا
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सिलसिले तोड़ गया वो सभी जाते जाते
अहमद फ़राज़ द्वारा
سلسلے توڑ گیا وہ سبھی جاتے جاتے
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पयाम आए हैं उस यार-ए-बे-वफ़ा के मुझे
अहमद फ़राज़ द्वारा
پیام آئے ہیں اس یار بے وفا کے مجھے
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आए हैं मीरؔ मुँह को बनाए ख़फ़ा से आज
मीर तक़ी मीर द्वारा
آئے ہیں میرؔ منہ کو بنائے خفا سے آج
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आरज़ूएं हज़ार रखते हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
آرزوئیں ہزار رکھتے ہیں
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है कहाँ का इरादा तुम्हारा सनम किस के दिल को अदाओं से बहलाओगे
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
ہے کہاں کا ارادہ تمہارا صنم کس کے دل کو اداؤں سے بہلاؤ گے
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वफ़ा-ए-वादा नहीं वादा-ए-दिगर भी नहीं
فیض احمد فیض द्वारा
وفائے وعدہ نہیں وعدۂ دگر بھی نہیں
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तुम अपनी याद से कह दो न जाए छोड़ के दिल
قمر جلالوی द्वारा
تم اپنی یاد سے کہہ دو نہ جائے چھوڑ کے دل
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काबे में जाँ-ब-लब थे हम दूरी-ए-बुताँ से
मीर तक़ी मीर द्वारा
کعبے میں جاں بہ لب تھے ہم دوریٔ بتاں سے
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इस से पहले कि बे-वफ़ा हो जाएँ
अहमद फ़राज़ द्वारा
اس سے پہلے کہ بے وفا ہو جائیں
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न दिल से आह न लब से सदा निकलती है
अहमद फ़राज़ द्वारा
نہ دل سے آہ نہ لب سے صدا نکلتی ہے
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इस क़दर मुसलसल थीं शिद्दतें जुदाई की
अहमद फ़राज़ द्वारा
اس قدر مسلسل تھیں شدتیں جدائی کی
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ज़िंदगी दर्द भी दवा भी थी
Amjad Islam Amjad द्वारा
زندگی درد بھی دوا بھی تھی
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मर भी जाऊँ तो कहाँ लोग भुला ही देंगे
परवीन शाकिर द्वारा
مر بھی جاؤں تو کہاں لوگ بھلا ہی دیں گے
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एक सूरज था कि तारों के घराने से उठा
परवीन शाकिर द्वारा
ایک سورج تھا کہ تاروں کے گھرانے سے اٹھا
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हैं बाद मिरे मर्ग के आसार से अब तक
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہیں بعد مرے مرگ کے آثار سے اب تک
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कब तक दिल की खैर मनाएं कब तक रह दिखलाओगे
فیض احمد فیض द्वारा
کب تک دل کی خیر منائیں کب تک رہ دکھلاؤ گے
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दोस्त बन कर भी नहीं साथ निभाने वाला
अहमद फ़राज़ द्वारा
دوست بن کر بھی نہیں ساتھ نبھانے والا
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नज़र बुझी तो करिश्मे भी रोज़-ओ-शब के गए
अहमद फ़राज़ द्वारा
نظر بجھی تو کرشمے بھی روز و شب کے گئے
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