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बेवफ़ाई

सभी 69अशआर 0ग़ज़ल 69
ग़ज़ल69
इस मंज़र-ए-सादा में कई जाल बंधे थे
اس منظر سادہ میں کئی جال بندھے تھے
कू-ब-कू फैल गई बात शनासाई की
کو بہ کو پھیل گئی بات شناسائی کی
ताक़त नहीं है दिल में ने जी बजा रहा है
طاقت نہیں ہے دل میں نے جی بجا رہا ہے
जब से उस बेवफ़ा ने बाल रखे
جب سے اس بے وفا نے بال رکھے
ख़त लिख के कोई सादा न उस को मलूल हो
خط لکھ کے کوئی سادہ نہ اس کو ملول ہو
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