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इस मंज़र-ए-सादा में कई जाल बंधे थे
अहमद फ़राज़ द्वारा
اس منظر سادہ میں کئی جال بندھے تھے
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कू-ब-कू फैल गई बात शनासाई की
परवीन शाकिर द्वारा
کو بہ کو پھیل گئی بات شناسائی کی
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ताक़त नहीं है दिल में ने जी बजा रहा है
मीर तक़ी मीर द्वारा
طاقت نہیں ہے دل میں نے جی بجا رہا ہے
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जब से उस बेवफ़ा ने बाल रखे
मीर तक़ी मीर द्वारा
جب سے اس بے وفا نے بال رکھے
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ख़त लिख के कोई सादा न उस को मलूल हो
मीर तक़ी मीर द्वारा
خط لکھ کے کوئی سادہ نہ اس کو ملول ہو
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ग़ैर ने हम को ज़बह किया ने ताक़त है ने यारा है
मीर तक़ी मीर द्वारा
غیر نے ہم کو ذبح کیا نے طاقت ہے نے یارا ہے
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क्या क्या बैठे बिगड़ बिगड़ तुम पर हम तुम से बनाए गए
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا کیا بیٹھے بگڑ بگڑ تم پر ہم تم سے بنائے گئے
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जो तू ही सनम हम से बेज़ार होगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
جو تو ہی صنم ہم سے بے زار ہوگا
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चले थे यार बड़े ज़अम में हवा की तरह
अहमद फ़राज़ द्वारा
چلے تھے یار بڑے زعم میں ہوا کی طرح
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गए जी से छोटे बुतों की जफ़ा से
मीर तक़ी मीर द्वारा
گئے جی سے چھوٹے بتوں کی جفا سے
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मेहर की तुझ से तवक़्क़ो थी सितम-गर निकला
मीर तक़ी मीर द्वारा
مہر کی تجھ سے توقع تھی ستم گر نکلا
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गूँगे लबों पे हर्फ़-ए-तमन्ना किया मुझे
परवीन शाकिर द्वारा
گونگے لبوں پہ حرف تمنا کیا مجھے
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आह के तईं दिल हैरान-ओ-ख़फ़ा को सौंपा
मीर तक़ी मीर द्वारा
آہ کے تیں دل حیران و خفا کو سونپا
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क्या तरह है आश्ना गाहे गहे ना आश्ना
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا طرح ہے آشنا گاہے گہے نا آشنا
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تجھے ہے مشق ستم کا ملال ویسے ہی
अहमद फ़राज़ द्वारा
تجھے ہے مشق ستم کا ملال ویسے ہی
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कौन से थे वो तुम्हारे अहद जो टूटे न थे
قمر جلالوی द्वारा
کون سے تھے وہ تمہارے عہد جو ٹوٹے نہ تھے
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इस में कोई फ़रेब तो ऐ आसमाँ नहीं
قمر جلالوی द्वारा
اس میں کوئی فریب تو اے آسماں نہیں
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तेरी गली में मैं न चलूँ और सबा चले
ख़्वाजा मीर दर्द द्वारा
تیری گلی میں میں نہ چلوں اور صبا چلے
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कई दिन सुलूक-ए-विदाअ का मिरे दर-पय-ए-दिल-ए-ज़ार था
मीर तक़ी मीर द्वारा
کئی دن سلوک وداع کا مرے درپے دل زار تھا
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ग़म-ए-दुनिया से गर पाई भी फ़ुर्सत सर उठाने की
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
غم دنیا سے گر پائی بھی فرصت سر اٹھانے کی
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