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चमन

सभी 4अशआर 0ग़ज़ल 4
ग़ज़ल4
बरश्काल-ए-गिर्या-ए-आशिक़ है देखा चाहिए
برشکال گریۂ عاشق ہے دیکھا چاہیے
नसीब आज़माने के दिन आ रहे हैं
نصیب آزمانے کے دن آ رہے ہیں
ऐ मेरे हम-नशीं चल कहीं और चल इस चमन में अब अपना गुज़ारा नहीं
اے مرے ہم نشیں چل کہیں اور چل اس چمن میں اب اپنا گزارہ نہیں
सैर कर अंदलीब का अहवाल
سیر کر عندلیب کا احوال
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उर्दू अदब की रूह की हिफ़ाज़त

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