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बरश्काल-ए-गिर्या-ए-आशिक़ है देखा चाहिए
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
برشکال گریۂ عاشق ہے دیکھا چاہیے
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नसीब आज़माने के दिन आ रहे हैं
فیض احمد فیض द्वारा
نصیب آزمانے کے دن آ رہے ہیں
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ऐ मेरे हम-नशीं चल कहीं और चल इस चमन में अब अपना गुज़ारा नहीं
قمر جلالوی द्वारा
اے مرے ہم نشیں چل کہیں اور چل اس چمن میں اب اپنا گزارہ نہیں
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सैर कर अंदलीब का अहवाल
मीर तक़ी मीर द्वारा
سیر کر عندلیب کا احوال
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