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दर्द

सभी 123अशआर 0ग़ज़ल 123
ग़ज़ल123
मेरी लौ लगी है तुझसे ग़म-ए-ज़िंदगी मिटा दे
مری لو لگی ہے تجھ سے غم زندگی مٹا دے
अश्क आँखों में कब नहीं आता
اشک آنکھوں میں کب نہیں آتا
दिल जो ज़ेर-ए-ग़ुबार अक्सर था
دل جو زیر غبار اکثر تھا
हसरत-ए-दीद में गुज़रां हैं ज़माने कब से
حسرتِ دید میں گزراں ہیں زمانے کب سے
देख तो दिल के जाँ से उठता है
دیکھ تو دل کہ جاں سے اٹھتا ہے
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उर्दू अदब की रूह की हिफ़ाज़त

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