ADABKHANA
शोअरा
ग़ज़लें
अशआर
मुहावरे
लुग़त
और
कुल्लियात
टैग्स
खोज
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
खोज
लॉगिन
रजिस्टर करें
लॉगिन करें
खाता बनाएँ
← टैग्स पर वापस
दर्द
सभी
123
अशआर
0
ग़ज़ल
123
0
पसंदीदा
पसंदीदा
शेयर करें
क्रम से लगाएं
लोकप्रियता
वर्णानुक्रम
0
मेरी लौ लगी है तुझसे ग़म-ए-ज़िंदगी मिटा दे
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
مری لو لگی ہے تجھ سے غم زندگی مٹا دے
0
अश्क आँखों में कब नहीं आता
मीर तक़ी मीर द्वारा
اشک آنکھوں میں کب نہیں آتا
0
दिल जो ज़ेर-ए-ग़ुबार अक्सर था
मीर तक़ी मीर द्वारा
دل جو زیر غبار اکثر تھا
0
हसरत-ए-दीद में गुज़रां हैं ज़माने कब से
فیض احمد فیض द्वारा
حسرتِ دید میں گزراں ہیں زمانے کب سے
0
देख तो दिल के जाँ से उठता है
मीर तक़ी मीर द्वारा
دیکھ تو دل کہ جاں سے اٹھتا ہے
0
है वजह कोई ख़ास मेरी आँख जो नम है
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
ہے وجہ کوئی خاص مری آنکھ جو نم ہے
0
गरचह कब देखते हो पर देखो
मीर तक़ी मीर द्वारा
گرچہ کب دیکھتے ہو پر دیکھو
0
चलते हो तो चमन को चलिये कहते हैं कि बहारां है
मीर तक़ी मीर द्वारा
چلتے ہو تو چمن کو چلئے کہتے ہیں کہ بہاراں ہے
0
करे क्या कि दिल भी तो मजबूर है
मीर तक़ी मीर द्वारा
کرے کیا کہ دل بھی تو مجبور ہے
0
पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है
मीर तक़ी मीर द्वारा
پتا پتا بوٹا بوٹا حال ہمارا جانے ہے
0
लज़्ज़त से नहीं ख़ाली जानों का खपा जाना
मीर तक़ी मीर द्वारा
لذت سے نہیں خالی جانوں کا کھپا جانا
0
गुल को महबूब हम क़यास किया
मीर तक़ी मीर द्वारा
گل کو محبوب ہم قیاس کیا
0
ऐ सनम तुझ को हम भुला न सके
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
اے صنم تجھ کو ہم بھلا نہ سکے
0
हमारे आगे तिरा जब कसू ने नाम लिया
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہمارے آگے ترا جب کسو نے نام لیا
0
सैर के क़ाबिल है दिल सद-पारा उस नख़चीर का
मीर तक़ी मीर द्वारा
سیر کے قابل ہے دل صد پارہ اس نخچیر کا
0
कली कहते हैं उस का सा दहन है
मीर तक़ी मीर द्वारा
کلی کہتے ہیں اس کا سا دہن ہے
0
इश्क़ में ज़िल्लत हुई ख़िफ़त हुई तोहमत हुई
मीर तक़ी मीर द्वारा
عشق میں ذلت ہوئی خفت ہوئی تہمت ہوئی
0
आप बैठे हैं बालें पे मेरी मौत का ज़ोर चलता नहीं है
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
آپ بیٹھے ہیں بالیں پہ میری موت کا زور چلتا نہیں ہے
0
बात बस से निकल चली है
فیض احمد فیض द्वारा
بات بس سے نکل چلی ہے
0
अब आँखों में ख़ूं दम-ब-दम देखते हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
اب آنکھوں میں خوں دم بہ دم دیکھتے ہیں
← पिछला
अगला →
कवियों की सूची
कवियों
और जानें