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दर्द-ए-दिल
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उस के कूचे से जो उठ अहल-ए-वफ़ा जाते हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
اس کے کوچے سے جو اٹھ اہل وفا جاتے ہیں
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कहते हैं बहार आई गुल फूल निकलते हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
کہتے ہیں بہار آئی گل پھول نکلتے ہیں
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गुज़रा बना-ए-चर्ख़ से नाला पगाह का
मीर तक़ी मीर द्वारा
گزرا بنائے چرخ سے نالہ پگاہ کا
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तेरी अबरू ओ तेग़-ए-तेज़ तो हम-दम हैं ये दोनों
मीर तक़ी मीर द्वारा
تری ابرو و تیغ تیز تو ہم دم ہیں یہ دونوں
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गुज़राँ हैं गुज़रते रहते हैं
जौन एलिया द्वारा
گزراں ہیں گزرتے رہتے ہیں
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सजदे तेरे कहने से मैं कर लूँ भी तो क्या हो
قمر جلالوی द्वारा
سجدے ترے کہنے سے میں کر لوں بھی تو کیا ہو
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हम ने किस रात नाला सर न किया
ख़्वाजा मीर दर्द द्वारा
ہم نے کس رات نالہ سر نہ کیا
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दिल मिरा फिर दुखा दिया किन ने
ख़्वाजा मीर दर्द द्वारा
دل مرا پھر دکھا دیا کن نے
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वाँ उसको हौल-ए-दिल है तो याँ मैं हूँ शर्म-सार
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
واں اس کو ہول دل ہے تو یاں میں ہوں شرم سار
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दुख फ़साना नहीं कि तुझ से कहें
अहमद फ़राज़ द्वारा
دکھ فسانہ نہیں کہ تجھ سے کہیں
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दिल अगर होता तो मिल जाता निशान आरज़ू
قمر جلالوی द्वारा
دل اگر ہوتا تو مل جاتا نشان آرزو
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वहशत-ए-दिल सिला-ए-आबला पाई ले ले
अहमद फ़राज़ द्वारा
وحشت دل صلۂ آبلہ پائی لے لے
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मर रहते जो गुल बन तो सारा यह ख़लल जाता
मीर तक़ी मीर द्वारा
مر رہتے جو گل بن تو سارا یہ خلل جاتا
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किस शाम से उठा था मिरे दिल में दर्द सा
मीर तक़ी मीर द्वारा
کس شام سے اٹھا تھا مرے دل میں درد سا
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क्या मुसीबत-ज़दा दिल माइल-ए-आज़ार न था
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا مصیبت زدہ دل مائل آزار نہ تھا
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उसी में ख़ुश हूँ मिरा दुख कोई तो सहता है
परवीन शाकिर द्वारा
اسی میں خوش ہوں مرا دکھ کوئی تو سہتا ہے
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यक्सू कुशादा रूई पर चीं नहीं जबीं भी
मीर तक़ी मीर द्वारा
یکسو کشادہ روئی پر چیں نہیں جبیں بھی
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क्या लड़के दिल्ली के हैं अय्यार और नट खट
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا لڑکے دلی کے ہیں عیار اور نٹ کھٹ
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बिसात-ए-अज्ज़ में था एक दिल यक क़तरा-ए-ख़ूँ वो भी
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
بساط عجز میں تھا ایک دل یک قطرہ خوں وہ بھی
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