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दीवानगी

सभी 33अशआर 0ग़ज़ल 33
ग़ज़ल33
नहीं वसवस जी गँवाने के
نہیں وسواس جی گنوانے کے
रात प्यासा था मेरे लहू का
رات پیاسا تھا میرے لوہو کا
तुम्हें भी चाहिए है कुछ तो पास चाहत का
تمہیں بھی چاہیے ہے کچھ تو پاس چاہت کا
दिल कितना आबाद हुआ जब दीद के घर बर्बाद हुए
دل کتنا آباد ہوا جب دید کے گھر برباد ہوئے
बे कसाना जी गिरफ़्तारी से शिवन में रहा
بے کسانہ جی گرفتاری سے شیون میں رہا
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उर्दू अदब की रूह की हिफ़ाज़त

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