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नहीं वसवस जी गँवाने के
نہیں وسواس جی گنوانے کے
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रात प्यासा था मेरे लहू का
رات پیاسا تھا میرے لوہو کا
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तुम्हें भी चाहिए है कुछ तो पास चाहत का
تمہیں بھی چاہیے ہے کچھ تو پاس چاہت کا
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दिल कितना आबाद हुआ जब दीद के घर बर्बाद हुए
دل کتنا آباد ہوا جب دید کے گھر برباد ہوئے
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बे कसाना जी गिरफ़्तारी से शिवन में रहा
بے کسانہ جی گرفتاری سے شیون میں رہا
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