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आम हुक्म-ए-शराब करता हूँ
मीर तक़ी मीर द्वारा
عام حکم شراب کرتا ہوں
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क़ुर्ब-ए-जानां का न मयख़ाने का मौसम आया
अहमद फ़राज़ द्वारा
قرب جاناں کا نہ مے خانے کا موسم آیا
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हुस्न-ए-बुतां का इश्क़ मेरी जान हो गया
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
حسن بتاں کا عشق مری جان ہو گیا
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कई बार इसका दामन भर दिया हुस्न-ए-दो आलम से
فیض احمد فیض द्वारा
کئی بار اس کا دامن بھر دیا حسنِ دو عالم سے
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जो मिटा है तेरे जमाल पर वो हर एक ग़म से गुज़र गया
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
جو مٹا ہے تیرے جمال پر وہ ہر ایک غم سے گزر گیا
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कुछ करो फ़िक्र मुझ दीवाने की
मीर तक़ी मीर द्वारा
کچھ کرو فکر مجھ دوانے کی
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उन के जलवों पे हम-वक्त नज़र होती है
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
ان کے جلووں پہ ہمہ وقت نظر ہوتی ہے
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रंग पैराहन का ख़ुशबू ज़ुल्फ़ लहराने का नाम
فیض احمد فیض द्वारा
رنگ پیراہن کا خوشبو زلف لہرانے کا نام
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आगे हमारे अहद से वहशत को जा न थी
मीर तक़ी मीर द्वारा
آگے ہمارے عہد سے وحشت کو جا نہ تھی
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बाहोश वही हैं दीवाने उल्फ़त में जो ऐसा करते हैं
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
باہوش وہی ہیں دیوانے الفت میں جو ایسا کرتے ہیں
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किसी का नाम लो बे-नाम अफ़साने बहुत से हैं
قمر جلالوی द्वारा
کسی کا نام لو بے نام افسانے بہت سے ہیں
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यह चश्म आईना-दार-ए-रू थी किसू की
मीर तक़ी मीर द्वारा
یہ چشم آئینہ دار رو تھی کسو کی
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अव्वल अव्वल की दोस्ती है अभी
अहमद फ़राज़ द्वारा
اول اول کی دوستی ہے ابھی
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तरे निसार न देखी कोई ख़ुशी मैंने
قمر جلالوی द्वारा
ترے نثار نہ دیکھی کوئی خوشی میں نے
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भला होगा कुछ इक अहवाल उस से या बुरा होगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
بھلا ہوگا کچھ اک احوال اس سے یا برا ہوگا
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मर मर गए नज़र कर उस के बरहना तन में
मीर तक़ी मीर द्वारा
مر مر گئے نظر کر اس کے برہنہ تن میں
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तंग आग़ोश में आबाद करूँगा तुझ को
जौन एलिया द्वारा
تنگ آغوش میں آباد کروں گا تجھ کو
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हमारे ज़ख़्म-ए-तमन्ना पुराने हो गए हैं
जौन एलिया द्वारा
ہمارے زخم تمنا پرانے ہو گئے ہیں
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पाये ख़िताब क्या क्या देखे अताब क्या क्या
मीर तक़ी मीर द्वारा
پائے خطاب کیا کیا دیکھے عتاب کیا کیا
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यूँ ही हैरान-ओ-ख़फ़ा जूँ ग़ुंचा-ए-तस्वीर हूँ
मीर तक़ी मीर द्वारा
یوں ہی حیران و خفا جوں غنچۂ تصویر ہوں
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