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दिल की वीरानी
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हस्ती अपनी हबाब की सी है
ہستی اپنی حباب کی سی ہے
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मुँह टका ही करे है जिस तिस का
منہ تکا ہی کرے ہے جس تس کا
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बे-यार शहर-ए-दिल का वीरान हो रहा है
بے یار شہر دل کا ویران ہو رہا ہے
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तेरा रुख़ मुख़तत क़ुरआन है हमारा
تیرا رخ مخطط قرآن ہے ہمارا
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वह अहद-ए-ग़म की काहिश-हाए-बे-हासिल को क्या समझें
وہ عہد غم کی کاہش ہائے بے حاصل کو کیا سمجھے
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