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दिल की वीरानी
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हस्ती अपनी हबाब की सी है
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہستی اپنی حباب کی سی ہے
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मुँह टका ही करे है जिस तिस का
मीर तक़ी मीर द्वारा
منہ تکا ہی کرے ہے جس تس کا
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बे-यार शहर-ए-दिल का वीरान हो रहा है
मीर तक़ी मीर द्वारा
بے یار شہر دل کا ویران ہو رہا ہے
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तेरा रुख़ मुख़तत क़ुरआन है हमारा
मीर तक़ी मीर द्वारा
تیرا رخ مخطط قرآن ہے ہمارا
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वह अहद-ए-ग़म की काहिश-हाए-बे-हासिल को क्या समझें
فیض احمد فیض द्वारा
وہ عہد غم کی کاہش ہائے بے حاصل کو کیا سمجھے
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बरंग-ए-बू-ए-गुल इस बाग़ के हम आश्ना होते
मीर तक़ी मीर द्वारा
برنگ بوئے گل اس باغ کے ہم آشنا ہوتے
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क्या मैं भी परेशानी-ए-ख़ातिर से क़रीं था
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا میں بھی پریشانیٔ خاطر سے قریں تھا
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दिल जो था इक आबला फूटा गया
मीर तक़ी मीर द्वारा
دل جو تھا اک آبلہ پھوٹا گیا
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निकले है चश्मा जो कोई जोश-ए-ज़नां पानी का
मीर तक़ी मीर द्वारा
نکلے ہے چشمہ جو کوئی جوش زناں پانی کا
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वहीं हैं दिल के क़राइन तमाम कहते हैं
فیض احمد فیض द्वारा
وہیں ہیں دل کے قرائن تمام کہتے ہیں
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कई बार इसका दामन भर दिया हुस्न-ए-दो आलम से
فیض احمد فیض द्वारा
کئی بار اس کا دامن بھر دیا حسنِ دو عالم سے
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जैसे हम बज़्म हैं फिर यार-ए-तरह-दार से हम
فیض احمد فیض द्वारा
جیسے ہم بزم ہیں پھر یار طرح دار سے ہم
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इश्क़-ए-सनम नमाज़ है है यही ज़िंदगी मिरी
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
عشق صنم نماز ہے ہے یہی زندگی مری
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कहीं सकूं न मिला दिल को बज़्म-ए-यार के बाद
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
کہیں سکوں نہ ملا دل کو بزم یار کے بعد
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जिस जगह दौर-ए-जाम होता है
मीर तक़ी मीर द्वारा
جس جگہ دور جام ہوتا ہے
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किस शहर न शहरा हुआ नादानी-ए-दिल का
فیض احمد فیض द्वारा
کس شہر نہ شہرہ ہوا نادانئ دل کا
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उधर से अब्र उठ कर जो गया है
मीर तक़ी मीर द्वारा
ادھر سے ابر اٹھ کر جو گیا ہے
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दहर भी 'मीर' तुर्फ़ा मक़्तल है
मीर तक़ी मीर द्वारा
دہر بھی میرؔ طرفہ مقتل ہے
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हर्फ़ ताज़ा नई ख़ुशबू में लिखा चाहता है
परवीन शाकिर द्वारा
حرف تازہ نئی خوشبو میں لکھا چاہتا ہے
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अक्स-ए-ख़ुश्बू हूँ बिखरने से न रोके कोई
परवीन शाकिर द्वारा
عکس خوشبو ہوں بکھرنے سے نہ روکے کوئی
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