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दिल शिकस्ता
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उधर से अब्र उठ कर जो गया है
ادھر سے ابر اٹھ کر جو گیا ہے
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बातें हमारी याद रहें फिर बातें ऐसी न सुनिए गा
باتیں ہماری یاد رہیں پھر باتیں ایسی نہ سنیے گا
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जल्वा जो तेरे रुख़ का एहसास में ढल जाए
جلوہ جو ترے رخ کا احساس میں ڈھل جائے
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सब क़त्ल हो के तेरे मुक़ाबिल से आए हैं
سب قتل ہو کے تیرے مقابل سے آئے ہیں
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तुझे पुकारा है बे-इरादा
تجھے پکارا ہے بے ارادہ
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