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दिल शिकस्ता
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रुकने का समय गुज़र गया है
رکنے کا سمے گزر گیا ہے
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ज़ख़्म-ए-उम्मीद भर गया कब का
زخم امید بھر گیا کب کا
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जफ़ाएँ देख लियां बे-वफ़ाइयाँ देखें
جفائیں دیکھ لیں یاں بے وفائیاں دیکھیں
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हर दम तरफ़ है वैसे मिज़ाज-ए-करख़्त का
ہر دم طرف ہے ویسے مزاج کرخت کا
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ख़ंजर ब-कफ़ वो जब से सफ़्फ़ाक हो गया है
خنجر بکف وہ جب سے سفاک ہو گیا ہے
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