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क़ुर्बतों में भी जुदाई के ज़माने माँगे
अहमद फ़राज़ द्वारा
قربتوں میں بھی جدائی کے زمانے مانگے
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चोरी में दिल की वो हुनर कर गया
मीर तक़ी मीर द्वारा
چوری میں دل کی وہ ہنر کر گیا
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देख तो दिल के जां से उठता है
मीर तक़ी मीर द्वारा
دیکھ تو دل کہ جاں سے اٹھتا ہے
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मक्का गया मदीना गया कर्बला गया
मीर तक़ी मीर द्वारा
مکہ گیا مدینہ گیا کربلا گیا
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उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया
मीर तक़ी मीर द्वारा
الٹی ہو گئیں سب تدبیریں کچھ نہ دوا نے کام کیا
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ताना ज़न था हर कोई हम पर दिल-ए-नादाँ समेत
अहमद फ़राज़ द्वारा
طعنہ زن تھا ہر کوئی ہم پر دل ناداں سمیت
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पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है
मीर तक़ी मीर द्वारा
پتا پتا بوٹا بوٹا حال ہمارا جانے ہے
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आह-ए-सहर ने सोज़िश-ए-दिल को मिटा दिया
मीर तक़ी मीर द्वारा
آہ سحر نے سوزش دل کو مٹا دیا
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क़ंद-ए-दहन
فیض احمد فیض द्वारा
قند دہن
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दिल जो था इक आबला फूटा गया
मीर तक़ी मीर द्वारा
دل جو تھا اک آبلہ پھوٹا گیا
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बग़ैर दिल के यह क़ीमत है सारे आलम की
मीर तक़ी मीर द्वारा
بغیر دل کہ یہ قیمت ہے سارے عالم کی
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पीरी में क्या जवानी के मौसम को रोइये
मीर तक़ी मीर द्वारा
پیری میں کیا جوانی کے موسم کو روئیے
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आए हैं मीरؔ मुँह को बनाए ख़फ़ा से आज
मीर तक़ी मीर द्वारा
آئے ہیں میرؔ منہ کو بنائے خفا سے آج
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मेरे संग मज़ार पर फ़रहाद
मीर तक़ी मीर द्वारा
میرے سنگ مزار پر فرہاد
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इस का ख़राम देख के जाया न जाएगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
اس کا خرام دیکھ کے جایا نہ جائے گا
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आगे जमाल-ए-यार के माज़ूर हो गया
मीर तक़ी मीर द्वारा
آگے جمال یار کے معذور ہو گیا
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शेर के पर्दे में मैं ने ग़म सुनाया है बहुत
मीर तक़ी मीर द्वारा
شعر کے پردے میں میں نے غم سنایا ہے بہت
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न गनवाओ नावक-ए-नीम-कश दिल रेज़ा रेज़ा गनवा दिया
فیض احمد فیض द्वारा
نہ گنواؤ ناوک نیم کش دل ریزہ ریزہ گنوا دیا
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मुस्तक़िल महरूमियों पर भी तो दिल माना नहीं
अहमद फ़राज़ द्वारा
مستقل محرومیوں پر بھی تو دل مانا نہیں
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जिस जगह दौर-ए-जाम होता है
मीर तक़ी मीर द्वारा
جس جگہ دور جام ہوتا ہے
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