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दोस्त

सभी 6अशआर 0ग़ज़ल 6
ग़ज़ल6
रफ़ाक़तों में पशेमानियाँ तो होती हैं
رفاقتوں میں پشیمانیاں تو ہوتی ہیں
जब तुझे याद करें कार-ए-जहाँ खींचता है
جب تجھے یاد کریں کار جہاں کھینچتا ہے
दोस्त बन कर भी नहीं साथ निभाने वाला
دوست بن کر بھی نہیں ساتھ نبھانے والا
ले उड़ा फिर कोई ख़याल हमें
لے اڑا پھر کوئی خیال ہمیں
दिल बदन का शरीक-ए-हाल कहाँ
دل بدن کا شریک حال کہاں
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