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अब इतनी सादगी लाएँ कहाँ से
परवीन शाकिर द्वारा
اب اتنی سادگی لائیں کہاں سے
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तेरा ये लुत्फ़ किसी ज़ख़्म का उनवान न हो
Amjad Islam Amjad द्वारा
تیرا یہ لطف کسی زخم کا عنوان نہ ہو
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परदे में इस बदन के छुपें राज़ किस तरह
Amjad Islam Amjad द्वारा
پردے میں اس بدن کے چھپیں راز کس طرح
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जब से उस बेवफ़ा ने बाल रखे
मीर तक़ी मीर द्वारा
جب سے اس بے وفا نے بال رکھے
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है बज़्म-ए-बुताँ में सुख़न आज़ुर्दा लबों से
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
ہے بزم بتاں میں سخن آزردہ لبوں سے
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यार मेरा बहुत है यार फ़रेब
मीर तक़ी मीर द्वारा
یار میرا بہت ہے یار فریب
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तिश्नगी ने सराब ही लिखा
जौन एलिया द्वारा
تشنگی نے سراب ہی لکھا
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